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Introspect Yourself

हर व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ना, उन्नति करना अच्छा लगता है। मनुष्य का स्वभाव आगे बढ़ने का है। हम सब जीवन में आनंद, शांति, प्रेम और खुशी चाहते हैं।

आइए हम अपने जीवन का अवलोकन करें कि हमारी आत्मउन्नति कैसे हो?

LET US INTROSPECT AND REFLECT UPON THESE QUESTIONS- 

1) आप अध्ययन क्या करते हैं? क्या पढ़ते हैं? WHAT TYPES OF BOOKS YOU LIKE TO READ?

Suspense, thrills, जासूसी novels, inspiring books उत्साह वर्धक, भक्तचरित, stories of great leaders, magazines, पत्रिकाएँ, कहानियाँ या positive thinking, self help books या हमारे ग्रंथ जैसे भगवत गीता, रामायण।

क्या हम केवल time pass करने के लिए पढ़ते हैं …या जिससे हमारी सोच सकारात्मक बनें, आत्मउन्नति हो, हम प्रसन्न रहें ऐसा शास्त्र पढ़ते हैं। READING MAKETH A MAN. पढ़ने से जीवन बनता है।

2) आप कैसा भोजन करते हैं? HEALTHY OR TASTY FOOD?

कहा गया है- जैसा खाए अन्न वैसा होए मन! भोजन मन यानि सूक्षम शरीर और स्थूल यानि शरीर को बनाता है।

  • रजोगुणी– तला भुना मसालेदार
  • तमोगुणी– उच्चिष्ठ, बसी, बदबूदार
  • सतोगुणी– फल, सब्जी, दाल, दूध, दही, मक्खन…..

Pizza, burger या noodles, छोले, चाट, पकौडी, fried, spicy food or simple nutritious food?

भोजन करते हुए हमारे भाव शुद्ध हों, या हम शांत भाव से भोजन ग्रहण करें या कोई आध्यात्मिक, भगवान की बात करें। भोजन बनाते हुए भी भाव शुद्ध हो, शुद्ध कमाई का हो, शुद्धता से खाया जाए और नाम जप चलता रहे। ऐसा भोजन शांति आनंद देता है। नहीं तो heart burn, जलन होगी।

“जो स्त्री भोजन बनाते हुए रोती है, उसके खाने वालों को भी रोना पड़ता है “

3. पानी कैसा पीते हैं? Cold drinks, hard drinks, fresh fruit juice, मठ्ठा ?

हमारे शरीर में 80% पानी है। Eg: Japanese scientist Emoto ने पानी पर experiments करे। पानी के दो sample लिये –

  • पहले को words of appreciation कहे-  thank you, i love you कहा, prayers बोलीं।
  • दूसरे water sample के आगे harsh words कहे-  you are stupid, useless, good for nothing.

जब दोनों को freeze किया तो एक मे beautiful crystal formation हुए और दूसरे में disturbing formation हुआ।

निष्कर्ष= जब हमारे भाव अच्छे होते हैं , मंत्रो का उच्चारण, नाम जप होता है, मन में प्रेम और
शांति होती है तो cells सुंदर बनते है।
जब हमारे विचार नकारात्मक, बेकार के, wasteful या गलत होते हैं तो cell formation खराब होते हैं।

 

4) आपको कैसे लोगो में रहना, मिलना-जुलना पसंद है?

There is a famous saying – As the company so the color.
क्या आप ऐसे लोगो से मिलना जुलना पसंद करते हैं जिनके जीवन का सिद्धांत है खाओ, पियो और ऐश करो, जो buttering करते हों या फिर संतों, teachers, mentors, friends जो हमारी उन्नति मे मदद करें?

Be in the company of people who are intellectually and spiritually elevated. Be in the company of Sadguru. Be very particular about your company. Birds of feather flock together.

5) आपके मन को कैसा स्थान प्रिय है?

Malls, picture halls, foreign countries, relatives, parties या फिर तीर्थ धाम, मंदिर, संतों का निवास स्थान, सत्संग जहाँ शांति हो, हरियाली हो, एकांत हो भगवान का धाम हो?

जैसे स्थानों मे आपको जाना पसंद होगा, आपकी मनोवृति वैसे ही बनेगी। Once a while कहीं जा सकते हैं।

6) आप समय कैसे व्यतीत करते हैं? HOW DO YOU SPEND YOUR TIME?

सोना, T.V देखना, गप्पे लड़ाना, facebook, whatsapp देखना, internet surf करना, पैसा कमाना या फिर…. सत्संग में बैठना, पढ़ना, लिखना, जप करना, सबकी help करना, किसी creative/constructive काम मे busy रहना?

“Every moment is precious !” आपका एक क्षण आपके जीवन को स्वर्ग एवं नरक बना सकता है। Value time, जीवन जा रहा है। If you pass time, time will pass you.

7) आपके मन के आग्रह क्या हैं?

हमारे क्या क्या आग्रह होते हैं:-
a) बच्चे जल्दी उठे सुबह,
b) सब काम समय से हों,
c) Exercise करनी चाहिए,
d) T.V ना देखें बच्चे,
e) Junk food न खाये,
f) सब मुझसे प्रेम से बोले

यह बातें हम अपने ऊपर तो लागू कर सकते हैं पर दूसरों पर नहीं! सबको accept करें। सारा दुख आग्रह में है।
MENTION IT BUT DO NOT INSIST

8) आपको क्या करना पसंद है? WHAT TYPE OF WORK DO YOU LIKE?

Options:-
a) स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों का हित्त करने का प्रयत्न करना
b) किसी को hurt न करना, हर कर्म का फल अतरंग भी है और बहिरंग भी है। ऐसा कर्म करें कि हमारी आदतें सुधरें, बिगड़ें नहीं। किसी का अहित न हो और हमारी आदतें बिगड़ें नहीं।

To help yourself help others, to love yourself love others.

 

9) आपके चिंतन की दिशा क्या है? WHAT DO YOU THINK?

Q:- सोने से पहले, जागते समय, एकांत में, बैठे हुए आप मन ही मन क्या सोचते रहते हैं?
हमारी सोच positive ( सकारात्मक) या negative (नकारात्मक) हो सकती है?

a) मैं दुखी हूँ, कोई मुझे प्यार नहीं करता, मेरी life मे बहुत दिक्कतें हैं, पैसे की कमी है, भगवान ने मुझे क्यूँ बनाया, मुझे डर लगता है, मेरा accident न हो जाए, बुराई करना और दूसरों के दोष देखने की आदत है या फिर….

b) आप हर बात का शुक्राना मानते हैं, खुश रहते हैं, माता-पिता का, भगवान का, गुरु का शुक्राना मानते हैं, सबके लिए हृदय से blessings निकलती हैं, भगवत भाव है, शुद्ध भाव है?
अपनी सोच पर बहुत ध्यान दे। जैसी आपकी चिंतन की धारा होगी वैसा ही आपका ठोस जगत और आस- पास का वातावरण बनेगा।

धीरे धीरे हमारा जीवन मधुर, सरस, सुकुमार और संगीतमय हो जाएगा कि हमें खुद आश्चर्य होगा। आप अमृत के पुत्र हैं और अमृत होने, रहने में ही आपके जीवन की सफलता है।

 

This Post Has 48 Comments

  1. Jagdish hardasani

    गुरू भगवान जी व गुरु माँ जी के श्री चरणों में नमन हैं और अनन्त अनन्त शुक्राने हैं। जिनकी कृपा से हमारा जीवन संगीतमय बना है । सच में बिना गुरु के जीवन कोलाहल ही था जिसमें न कोई रिदम न कोई तालमेल था ।
    सच में सारी कृपा सदगुरू भगवान जी की है ।

    चाँद अधूरा है सितारो के बिना
    गुलशन अधूरा है बहारों के बिना
    समुन्द्र अधूरा है किनारे के बिना
    ऐ मेरे सतगुरू
    मेरा जीवन अधूरा है तेरे सहारे के बिना

  2. Anu

    हम जैसा भोजन करते हैं।जैसा जल पीते हैं।जो अध्यन्न करते हैं सभी से हमारा भाव,हमारा जीवन बनता है।कितने अछे प्रकार से इस लेख के माध्यम से समझाया गया।
    अति उत्तम लेख।
    हम इन्हें जीवन मे धारण कर पाए ये प्राथना है ।
    अत्यंत वन्दन।

  3. Umesh garg

    सदगुरु ही हमको सही समझ देते हैं, सब अच्छे से बता कर फ्री कर देते हैं। जैसा हमारा संग होता हैं वैसे ही भाव भी आते हैं। गुरु जी के साथ लगता हैं हमारे हाथ में ही हैं इस युग को सतयुग बनाए या कलयुग। आपकी कृपा हम पर बनी रहें

  4. Pinki

    Anant anant shukrane bhagwan ji ?? her pal hamaari unnati ke liye aap ki athak mehnat v niranter pryaas ke hirdye se anant shukrane hai ???

  5. अनिल कुमार भारद्वाज

    सद्गुरुचरण में नमन प्रणामः, सद्गुरु भगवान ने हमारी दृष्टि हमारे भले के लिए ही स्वयं हमारी ओर ही मोड़ दी है।अपने दोष देखो,अपनी कमजोरियों को चुन चुन कर बाहर करते जाना है। आत्म दर्शन व आत्म चिंतन करते हुए स्वयम शोधन कर खुद को धीर पुरुष बनाने की राह का चयन करना है। अनन्त अनन्त शुक्राने भगवान जी??????

  6. Avinder Kaur

    गुरू भगवान के अनंत अनंत शुकराने है मन को शांत करने के बहुत ही खूबसूरत points के साथ साथ खाने और व्याम करके शरीर को कैसे स्वास्थ्य रखना है भी बताया। आप जी के अनंत अनंत शुक्रराने है

  7. Geeta

    Sare Anant Anant shukrane shukrane shukrane Mere Param Pujya SatGuru Bhagwan ji k hai , Aap ji ne jeewan Jyoti prakat kar di… Hey NATH JI Aap ji ko kabhi bhulu nahi ???????

  8. Pramod Aggarwal

    These tips helps in understanding life meaning and help to over one depression
    Thanks for such a extremely good blog
    Shukrane bhagwan ji

  9. Nupur Srivastava

    Very nice article. Guru bhagwan evam Guru maa ke anant-anant shukrane.

  10. Savita Churiwala

    Guru bhagwan ji ko koti koti vandan hai aap hame jeevan jeene ki kala sikha hai
    Kya khaye kese bhojan pakkye kese vyavahar kare kitne prem se saral dhag se sikha rahe hai
    Hey Nath Har Pal Aap Ki Yaad Me Rahoo

  11. Sarita Mittal

    गुरु भगवान जी एवं गुरु मां को कोटि कोटि प्रणाम ?? गुरु कृपा से जीवन में change aa raha h. गुरु भगवान हमारे आहार व्यवहार सबको सुधार कर एक अच्छा इंसान बना रहे हैं। भगवान से प्रेम करना सिखा रहे हैं ये मोटी बुद्धि कब समझेगी, गुरु भगवान हमारे लिए इतनी मेहनत करते हैं। गुरु की कृपा से ही सब होगा ऐसा विश्वास है ?? गुरु की प्रेरणा से ही सब हो रहा है। शुक्राने भगवान जी आपके प्रेम के।

  12. Renu kishor

    Guru bhagwan ji avm guru maji ke anant anant shukrane hai, very beautifully article guru bhagwan ji
    “Every moment is precious !” आपका एक क्षण आपके जीवन को स्वर्ग एवं नरक बना सकता है। Value time, जीवन जा रहा है। If you pass time, time will pass you.

  13. Radha rani

    गुरु भगवान जी को नमन है।
    भगवान जी आप जो हमे आत्मा निरीक्षण के बारे में समय समय पर बताते रहते है,उसका एक बहुत सुंदर compilation इस आर्टिकल के द्वारा प्रस्तुत किया है।
    आत्म निरीक्षण से इंटरनल बहुत progress होती है ,भले एक एक परसेंट हो।सेल्फ चेकिंग होती है,हर क्षेत्र में।दूसरे पर से दृष्टि हटकर अपने पर आ जाती है।मन की कमजोरी मालूम चलती है,आपके दिव्य वचनों से मन मजबूत होता है। जीवन का उद्देश्य निश्चित होता है।
    आपके अनंत अनंत शुक्रराने हैं।

  14. Bharti

    पूज्य गुरु भगवानजी और पूज्य गुरु माँ जी , आपके अनन्त शुकरने ह्रीं जो इतने सुंदर तरह से सब points बतायें हैं आत्म निरीक्षण करने के लिए। आपके श्री चरणों में नमन है।

  15. Kanishka khandelwal

    Guru bhagwan ji annat anant sukrane hai??Bhut bhut accha article hai.. hume yh saare points apne jeewan mai utarne chaiye ki badle vichaar to badle jeewan..aur sch mai guru bhagwan ji ki shanran mai aakr to jeewan mai badlaw aa hi rha h… sukrane bhagwan ji??

    1. अनिल कुमार भारद्वाज

      सद्गुरुचरण में नमन प्रणामः, सद्गुरु भगवान ने हमारी दृष्टि हमारे भले के लिए ही स्वयं हमारी ओर ही मोड़ दी है।अपने दोष देखो,अपनी कमजोरियों को चुन चुन कर बाहर करते जाना है। आत्म दर्शन व आत्म चिंतन करते हुए स्वयम शोधन कर खुद को धीर पुरुष बनाने की राह का चयन करना है। अनन्त अनन्त शुक्राने भगवान जी??????

  16. Manju Garg

    Guru bhagwan ji aur Guru MAA ji aap ke anant anant shukrane hain. Bahut hi practical aur effective blog hai. Hume dusron ko badalne ki jaroorat nahi balki apne ko hi check karna hai tabhi unnati hogi.
    Bhagwan ji ye aap ki hi kripa hai Jo Humari drishti aap ne Humari hi taraf Kara di.
    Hume har pal aage badhane ke liye shukriya Bhagwan ji.

    1. Anju Rana

      All the points are worth emulating and worth reading again and again so as to bring them in our daily routine.
      Guru Bhagwan ji ki mehnat k anant shukrane hain.

  17. Sonia batra

    Guru bhagwan ko hriday se vandan
    Bhagwan ji aap hamari unnati karwa rahe ho har zone ko sudhar rahe ho kitni hi baate aisi hoti hai jo apke vachan milne ke baad pata chalta hai ki abhi hame kaha jaada work karna hai bhagwan ji wo bhi aap hi karwate ho apni shakti dekar aap hame har pal sambhal rahe ho
    Mere payare guru ji ki athak mehnat ko naman hai
    Aise guru ke bali bali jaau
    Anant anant koti koti shukrane hai mere rehbar

  18. Rita sehgal

    I bow my head ?to my Mentor who has taught me the meaning of introspection.This article is so beautifully written and is like a self test for us.Am practicing hard “just Mention but do not insist”these days by the grace of my Mentor as without his true guidance it is not easy to walk in life. ??

  19. Rakhee kandhari

    Great thanks to Guru bhagwanji for helping us becoming affirmative in life. Life is really simple but we insist on making it complicated. Beautifully described how to live life.

    1. Laxmi

      Bhagwan ji apke sanidhya se hi sikh mili he ki badle vichar aur badle jeewan. Sabke bare me acha soche. Itne ache article ke bhut bhut shukrane hain. Radhe radhe bhagwan ji

  20. Seema namdev

    Guru Bhagwan ke anant anant shukrane. Koti koti naman hai. Is mahatpurn, upyogi jankari jisse hum log upne jeewan me upna kar ek sukhi, anandmay jeewan ji paaye.

    1. Ritu bajaj

      We are grateful to our Guru bhagwan. Bhagwan ji I am willing to change. When we gave pure vibrations we felt peace in our mind. Tell them but not insist Then We got the good results.We would like to hear more &more Guru ji vani.We would like to go to Spritual places. As the company so the colour. It is so true.Our mentor is pure & soft hearted.Many many thanks to our Guru bhagwan ji & Guru Maa ji.

    2. Surinder bajaj

      Thank you Guru Bhagwanji for highlighting the ways by which we can spend our precious time.The article beautifully defines the importance and true meaning of introspection. aap ji ke anant shukrane hai

  21. Manish namdeo

    Guru bhagwan ji ke anant shukrane hai. Aachar, Vichar va reading habit ko kaise theek rakhe, bahut hi informative and helpfull .Aapke anant shukrane.

    1. Geeta Joshi

      मेरे परम पूज्य श्री सद्गुरु भगवान जी व मेरी परम पूजनीय श्री सतगुरु मां जी के श्री चरणों में साष्टांग नमन व वंदन है गुरु भगवान जी हमें हर तरह से सच्चा वह समझदार बना रहे हैं जैसे खाना, पीना, रहना, उठना, बैठना ,बोलना, हर तरह से स्पेशल बना रहे हैं ऐसे गुरु हमारे जीवन में आए हम भगवान के शुक्राने मानते हैं जो हमें भगवान के रूप में ऐसे गुरु मिले मेरे प्रिय गुरु को हृदय से अनन्य बार शुक्राने शुक्राने शुक्राने शुक्राने है??‍♀️?

  22. Madhu Gaur

    गुरु भगवान जी एवं गुरु मां को अनंत कोटि नमन है ??
    The best thing about this article is — यह आजकल बोली जाने वाली भाषा – हिंदी व इंग्लिश का मिश्रण है जिसे ज्यादा से ज्यादा लोग समझ पाएंगे ।
    हर आर्टिकल को पढ़ते समय यही भाव रहता था कि इंग्लिश को नहीं समझने वालों को कैसे लाभ मिले ।
    कुछ पॉइंट्स के बारे में जो भी जानते थे वो अधूरी बात थी – यह अब पता चला ।
    पूरी और perfect बात से हमारे जीवन की क्वालिटी में निश्चित रूप से सुधार हो रहा है ये व्यवहार काल में पता चल रहा है ।
    हमारे जीवन की दशा वे दिशा सुधारने वाले गुरु जी के अनंत अनंत शुक्राने हैं ??

  23. Jyotsna Rustagi

    Guru Bhagwaan ko hriday se naman hai. Guru hi humko apni pehchaan karna sikhate hai. Guru Bhagwaan aapke jeevan me aane se jeevan me bahut improvement hui bhagwaan ji aap pal pal humare sath rehna. Radhe Radhe Bhagwaan ji

  24. Pramod kumar bansal

    ने बताया
    भोजन के बारे मै उपयोगी बाते बताएं कि हम हेल्थी फूड खाए या टेस्टी फूड खाए। आपने बताया कि हम समय कैसे वयतीत करे, आग्रह ही दुख का मूल कारण है।हमारी सोच नेगेटिव तो नहीं है। सोच के अनुसार ही हमारा आसपास के वातावरण बनता है।
    जो भी पढ़े , आत्म उन्नति के लिए पढ़े।
    पानी कैसा पीना चाहए। आदि आदि।

    जब हमारे भाव अच्छे होते हैं , मंत्रो का उच्चारण, नाम जप होता है, मन में प्रेम और शांति होती है।
    आपका शुक्रिया शुक्रिया

  25. Anjana Dhingra

    Guru bhagwan ji avm Guru maa ji ko hridye se naman hain?bhagwan ji bahut sunder v saral tareeke se aapne samjhaya ki kese hm kuch ache parivartan krke hm apne jeevan ko change kr sakte hain. Apna avlokan krne ki kla bhi aap ne hi sikhai hei. Aapke dil se shukrane hain. ????

  26. Sonia

    Hirdey se shukrana bhagwanji har tarah se hame aware karne k liye??

  27. Pramod kumar bansal

    Guru says and explains

    Self respect is a vital component of your inner life, and is part of a healthy connection with yourself. Love is a vital component of your outer life and is about connecting with someone else.

    Self-respect and love are both valuable, and there are important links between the two.

    Guru ke anant anant sukrane hai

  28. Mona

    Very Nice Article . THANK YOU so Much ! Guru bhagwanji ke anant shukarane hain jo hame chautarfa gyan dete hain. ???

  29. Bhawna chitkara

    We know all these things which r mentioned in above article but we don’t apply practically in our life..by the grace of our divine Guru bhagwanji we can follow all the rules in our life to make our life much better.. shukarne ?❤

  30. Shikha Bansal

    Guru bhagwan ji ke anant anant shukrane hai
    Jinhone hume yah bataya ki jesa hum sochte vahi hota hai or hum jesa Ann khate hai vesa hi humara man banta humhe satvick bhojan khana chayiye
    Jisse humara Swath or man theek rahta hai
    Naam jap or acchi book padne se posibity aati hai
    Hume simple rahna chayiye showoff nahi karna
    Chayiye ??

  31. Sonia Malhotra

    A very awakening article, only a mentor like our guru bhagwan ji tells us the art of living, how to introspect ourselves.
    Lots of thanks to our guru bhagwan ji.

  32. Stuti kapoor

    Thankyou guru bhagwanji for sharing such a nice article with us..Only you awaken us towards the right and wrong in life . Only you change our perspective towards better nd good things in life….We are blessed to have you as our mentor .Thankyou for ur infinite love,never-ending grace nd hardwork…..Apke anant anant shukrane..

    1. Ankita Mehra

      Thank you so much Guru Bhagwan ji for sharing such a beautiful article. This not only helps us to introspect ourselves but also guides us to the path for our betterment. आपके प्रेम के अनन्त अनन्त अनन्त शुकराने है।

  33. Anu arora

    Respected Gurubhagwanji ki kripa hi kripa hai. Jo
    Humey itne gyanverdhak articles dwara rise karne ki opportunity de rahe hain.

    Hum kya khaye,kis parkaar bhijan pakaye
    Hamari reading kya hai.
    Water formation ka examples sab kuch bahut learning hai.
    Thankyou Gurubhagwanji

    1. Sunita Khetan

      Thanks a ton bhagwanji
      Sirf guru bhagwanji hi Hume har prakar se develop Kate hain.
      Shukrane shukrane shukrane

  34. Sunita vohra

    Guru Bhagwan ji Guru maa ji ko koti koti naman apki kripa se ye point acha lga ki hamara chintan kya hai apki kripa se jab se satsang mai aye apke anmol vachano ko suna tab se ye jana ki chintan Bhagwan ji k ho sab kuch krne vale Bhagwan ji hai hamara prem Bhagwan ji se ho jaye apke samrpit hai aap hi krayege apki kripa k anant anant shukrane .

  35. Jyoti Bathla

    बहुत सुन्दर article है जब हम अपना अवलोकन करते हैं तो पाते हैं कि पहले से काफी जीवन बदला है सोच सकारात्मक हुई है खान पान में बदलाव आया है स्वीकार भाव आया है सारे शुकराने गुरु भगवान जी के एवं गुरु मां जी के हैं लेकिन अभी बहुत प्रयास करना है अभी पूरी तरह गुरू वचनों का पालन नहीं कर पाते गुरू मां एवं गुरु भगवान जी के दिव्य प्रेम के अनंत अनंत शुकराने है जो निरंतर हमारा मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं सारे points अनुकरणीय है

    1. Anju Rana

      Guru Bhagwan ji the article is an eye opener for all of us. It’s an opportunity to see where we lack and thus improve in those spheres.
      Many many thanks ??for sharing such informative blogs….. Will abide by your points. Shukrane.

      1. Tushar

        Gurubhagwanji ke Anant Anant shukraane hain,
        This article forces us to ponder about things that we feel are important to us, by putting forth questions and giving us probable solutions,

  36. Geeta

    मेरे परम पूज्य सद गुरु भगवान परम पूज्य सद गुरु माँ जी आप जी के पावन चरण कमलों में साष्टांग नमन है ?आप जी की अनंत महिमा को कोटि कोटि नमन है ?आप जी ही सदा याद रहे आप जी ही प्यारे लगे ?????????????‍♂️?‍♂️

  37. Ritika pal

    बहुत ही अच्छा article है भगवान जी।
    सभी points बहुत अच्छे हैं , हमारे चिंतन की दिशा क्या है ये प्वाइंट बहुत अच्छा लगा भगवान जी।
    आप बार बार हमें alert करते हैं कि जैसा सोचेंगे वैसा ही हमारा जीवन हो जाएगा ।
    गुरु भगवान जी के अनंत अनंत शुक्राने हैं

  38. Ananya

    Very Very Awakening article, one of the points that I felt is the best for me out of all is that we should always be alert regarding our company, we should be in the company of our Sadguru. When we expose ourselves to a bad company, we do not even get to know when we become just like them, and there is no control over it. Our Guru Bhagwan ji, teach us that we should be aware while making friends and choosing our company beforehand itself.
    Thank you very much for this beautiful article.????

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